Posted by: Devi Nangrani | दिसम्बर 19, 2013

“सिंध जी आंउ जाई आहियाँ -कमल प्यासी

देवी नागरानी जे किताब “सिंध जी आंउ जाई आहियाँ “ खाँ मुतासिर थी – लेखक: कमल प्यासी

1

सून्ह संदस शब्दन में आहे

लफ़्ज़ लफ़्ज़ मोतियुन जो हार

शायद हुन जो हिरदों कोमल

ग़ज़ल लिखे थी सदा बहार

2

कुछ ब लिखण खाँ अगमें शायद

घणों घणों हूअ सोचे थी

उधमा दिल जा ओतण खाँ अग

बहर वज़न खे परखे थी

3

देश-विदेश जूं करे ज़ियारतूँ

नवां नवां इज़िहार करे थी

सादी सूदी सिंधीअ में हूअ

लिखी वरी इकरार करे थी

4

छुए थी दिल खे उहा शायरी

जेका उधमन वारी आहे

जीवन जी घटनाउन जी हीअ 

जण का चित्रकारी आहे

5

शेर संदस टांडाण आहिन

ऊंदह खे चिमकाइन था

गीतन जो आकार सँवारे

लफ़्ज़न में छलकाइन था

6

सोच जी ऊंची अथस उड़ाम

माक भिनल कविताऊं हुन जूं

फ़न फ़िक्र जो संगम देवी

ग़ज़ल ग़ज़ल अदाऊँ हुन जूं

7

सिंध जी जाई हिन्द में आई

ख्यालन खे सिंदूर लगाइण 

वाट थी गोल्हे अगयां वधण जी

मंज़िल चाहे देवी पाइण।   *

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